इमोशनल अत्याचार

   


   

 इमोशनल अत्याचार दुनिया में होने वाली सबसे बड़ी हिंसा है। इमोशनली तौर पर किसी से हमदर्दी प्राप्त करते–करते कब इमोशनल ब्लैकमेलर हो जाते हैं हमें पता ही नहीं चलता है। अतः इसकी खोज हमें करते रहना चाहिए कि कहीं हम किसी के ऊपर इमोशनल अत्याचार तो नहीं कर रहे हैं।इस प्रकार की हिंसा अपनी अहमियत बताने से प्रारम्भ होती है।हम सोचते हैं कि किसी के जीवन में हमारी अहमियत  खत्म हो रही है । हम चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति पहले जैसी अहमियत हमें दे। लेकिन ऐसा ना होने पाने पर हम दुखी होते हैं और इमोशनल अत्याचार करना प्रारंभ कर देते हैं। इस अत्याचार की शुरुआत  छोटे स्तर से प्रारंभ होती हैं जैसे "हम कौन होते हैं तुम्हारे" या "अब तुम वैसे नहीं रहे जैसे पहले थे" इस प्रकार की तमाम बातें होती हैं। इसका बड़ा रुप है ; (रोते हुए) "मेरी एहमियत तुम्हारे जीवन में थी ही नहीं सब दिखावा था" यहां तक पहुंची है। कभी-कभी यह बहुत विकराल रूप भी ले लेती है। इमोशनल अत्याचार एक प्रकार का मानसिक अत्याचार है और यह शारीरिक अत्याचार तक बढ़ जाता है। यह अत्याचार की अंतिम सीमा होती है। लेकिन इसके पीछे के कारण को जानकर आप दंग रह जाएंगे जैसे जैसे हम एक दूसरे से मिलना प्रारंभ करते हैं एक दूसरे के बारे में जानने की जिज्ञासा होती है लेकिन यह धीरे-धीरे पूरी होने लगती है और एक वक्त आता है जो हम पूरी तरीके से परिचित हो जाते हैं तब इतनी उत्सुकता नहीं रहता है । इसलिए हमें प्रतीत होने लगता है कि व्यक्ति के जीवन में हमारी अहमियत नहीं रही जब की अहमियत हमेशा होती है हर व्यक्ति की बस इतनी उत्सुकता खत्म हो जाती है उतना अटेंशन खत्म हो जाता है जो पहले था। इसे इस तरह नहीं मानना चाहिए कि व्यक्ति ध्यान नहीं दे रहा है।यह एक मनोविज्ञान है जो हर व्यक्ति के जीवन में होता है इसलिए ऐसा मान के ही चले कि यह होकर रहेगा जीवन में कभी इमोशनल अत्याचार सहने और करने की जरूरत नहीं होगी।





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