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नेटुआ

रतन वर्मा कृत नाटक नेटुआ जब शुरू होता है मिथिलांचल लोक नृत्य परंपरा में एक जोगीरा बजता है जो दर्शकों के हृदय को भावविभोर कर देता है ,जोगीरा संवाद परंपरा का गीत होता है ,जिसमें प्रश्न कोई और पूछता है और उत्तर कोई और देता है ’ कईसन हउवे हो ब्रिजबनव कईसन हउवे हो जमुनावा कईसन हउवे बाल कन्हैया कौन झुकावे ला झुलनवा ‘’ नेटुआ शब्द का अर्थ होता है माटी का खिलौना जो कि पुरुष नर्तक के लिए प्रयोग प्रयोग होता है नेटुआ कलाकार छोटी जात का होता है जो खेती किसानी और पशुपालन के साथ नाचता भी है .यह बहुत सधे कलाकार होते हैं. कभी-कभी तो पेशेवर नर्तको को भी पछाड़ देते हैं ये .गांव में मुखिया, बाबुओं ,और बड़े लोगों के मनोरंजन के साधन होते हैं कभी-कभी प्रधानी के चुनाव में भी इनका प्रयोग प्रचार में होता है लोग इनके स्र्तियोचित स्वभावऔर पहनावे के कारण अपना मनोरंजन करने के साथ-साथ इनसे अश्लील हरकतें भी करते हैं. इस नाटक का मुख्य पात्र झमुना जब सुनता है कि उसका बेटा रामप्रताप शहर में बहुत बड़ा कलाकार हो गया है बड़े बड़े मंचों पर नाच करता है तो बहुत दुखी ...

शेखर के गांव में

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            सुबह-सुबह चंद्रशेखर जी से जब मिले तो हम दोनों दही जलेबी खाने के लिए एक दुकान में पहुंचे प्रशांत जब इलाहाबाद आते हैं तो उनका लक्ष्य रहता है कि इस दुकान से दही जलेबी खानी है ,इस दुकान से प्याज के पकौड़े खाने हैं और इस दुकान से लस्सी पीनी  हैमैंने चंद्र शेखर जी के लिए भी ऐसा ही सोचा पर यह एक खराब शुरुआत थी क्योंकि चंद्रशेखर सौ ग्राम जलेबी भी पूरी नहीं खाना चाह रहे थे मीठे की अधिकता के डर से, पर जहाँ भी गए वही मिठायी खानी पड़ी,  इस पूरे दिन में हमने इतनी मिठाई खाई जितनी जितनी मैंने  सप्ताह  भर में या चंद्रशेखर ने पूरे महीने भर में नहीं खाई होगी,  चंद्रशेखर को उनके एक पुराने मित्र मिल गए उन्होंने हम सब को खूब मिठाई खिलाई यह कहते हुए साल भर के बाद तो मिले हो फिर जाने कब मिलोगे तो उनको यह जो प्यार भरी सजा मिल रही थी उसका साझीदार मैं भी था क्योंकि मैं भी उनसे साल भर के बाद ही मिल रहा था.     शाम को 4:00 बजे  हम उनके गांव के लिए निकल पड़े हम बातें करने में इस कदर मशगूल थे कि जाना था जिस ओर हम उसकी विपरीत दिशा में ...

कौसानी की यादें

   इस यात्रा की शुरुआत से पहले ही मुझे इस बात पर आश्चर्य हो रहा था कि अंकित जी और मैं एक सप्ताह या दस दिन तक साथ रहेंगे । इससे पहले तो होता यह रहा है कि जब तक किसी बात पर सोच विचार ...