नेटुआ
रतन वर्मा कृत नाटक नेटुआ जब शुरू होता है मिथिलांचल लोक नृत्य परंपरा में एक जोगीरा बजता है जो दर्शकों के हृदय को भावविभोर कर देता है ,जोगीरा संवाद परंपरा का गीत होता है ,जिसमें प्रश्न कोई और पूछता है और उत्तर कोई और देता है ’ कईसन हउवे हो ब्रिजबनव कईसन हउवे हो जमुनावा कईसन हउवे बाल कन्हैया कौन झुकावे ला झुलनवा ‘’ नेटुआ शब्द का अर्थ होता है माटी का खिलौना जो कि पुरुष नर्तक के लिए प्रयोग प्रयोग होता है नेटुआ कलाकार छोटी जात का होता है जो खेती किसानी और पशुपालन के साथ नाचता भी है .यह बहुत सधे कलाकार होते हैं. कभी-कभी तो पेशेवर नर्तको को भी पछाड़ देते हैं ये .गांव में मुखिया, बाबुओं ,और बड़े लोगों के मनोरंजन के साधन होते हैं कभी-कभी प्रधानी के चुनाव में भी इनका प्रयोग प्रचार में होता है लोग इनके स्र्तियोचित स्वभावऔर पहनावे के कारण अपना मनोरंजन करने के साथ-साथ इनसे अश्लील हरकतें भी करते हैं. इस नाटक का मुख्य पात्र झमुना जब सुनता है कि उसका बेटा रामप्रताप शहर में बहुत बड़ा कलाकार हो गया है बड़े बड़े मंचों पर नाच करता है तो बहुत दुखी ...