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दिसंबर 31, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वह कभी हिंसक नहीं होता

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    वह एक पुराना पेड़  जिस पर झूलों के रस्सियों के निशान है  उस पर बैठी कोयल  और उसका गीत   पपीहे की आवाज  गिलहरी की चालाकी  और कौवा जो हमारा बचपन से ही दोस्त होता है  आसमान में उड़ता सुग्गो का झुण्ड  और तलब में तैरता बत्तख की सुन्दरता  पहाड़ों में सूरज के उगने और डूबने  का गुलाबी खेल  मटर के खेत की खुशबू सरसों के पीले खेत  त्योहारों की उमंग   गेंहूँ के लहराते खेत  धान के बालियों की सुन्दरता  गन्ने के खेत से आती गुड बनने  की सुगंध  मिटटी की सोंधी सुगंध  इनसब को जीवन मानने वाला  कभी हिंसक नहीं होता ....