नैनो स्टोरी
आज मैं जब बगीचे में पंहुचा तो रोज की तरह मैं पत्थर पर नहीं बैठा उसके बगल में बैठ गया मिट्टी में .उसके ऊपर हाथ टिका लिया जैसे लंगोटिया यार हो .मैं अक्सर कई महीनो से यहाँ आया करता था और इसी पर बैठ कर गजल सुना करता था , कभी उसपर बैठ कर पेड़ों को देखता रहता , कभी ध्यान भी करता था .यह पत्थर बड़ा ही प्यारा लगने लगा था .पता नहीं क्यों आज जब मैं यहाँ आया तो इसपर बैठने की इच्छा नहीं हुयी .मैं उसे पागलों की तरह बातें करने लगा .बहुत देर तक बात की .यह भूल चूका था कि मेरे बगल में पत्थर रखा है .मैं बोलता गया .फिर कुछ देर बाद शांत हुआ , जुबान से निकल ही गया ...तुम क्यों नहीं बोलते कुछ ,हमेशा चुप क्यों रहते हो ,और मैं ऊपर की तरफ देखने लगा .अचानक मेरे कान में एक आवाज हुयी ,तुम इतना बोलते हो अभी तक क्या पाया बोलने से ....