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मई 21, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बादल हंस रहे थे...

बारिश में भीगते हुए एक जगह बैठ गया एक पतली सी धार बहा लायी थी कुछ रेट मैंने चुपके से रेत पर उनका नाम लिख दिया और खुस हुआ कि कोई देख नहीं रहा है और फिर क्या था बिजली चमकी थोड़ी द...