बादल हंस रहे थे...
बारिश में भीगते हुए एक जगह बैठ गया एक पतली सी धार बहा लायी थी कुछ रेट मैंने चुपके से रेत पर उनका नाम लिख दिया और खुस हुआ कि कोई देख नहीं रहा है और फिर क्या था बिजली चमकी थोड़ी द...
अतीत यादों का एक तालाब है,जिसमें हम कभी भी डुबकी लगा सकते हैं तैर सकते हैं गुजरे समय में यात्रा कर सकते हैं। इसी तरह साहित्य भी अतीत का सागर है जिसमें साहित्य शिल्पी कल्पनालोक में डूब कर उससे एकाकार हो जाते हैं।इसी महासागर की कुछ सीपियां हमारे हमारे वर्तमान को सुखद बना देती हैं, भविष्य को रोशन कर देती है... शेखर की डायरी के यह पन्ने अतीत के सागर की सिपियों से निकले कुछ मोती हैं,जिन्हें मैं इसलिए एक डोर में गूंथ रहा हूं ताकि आत्मवलोकन कर सकूं,खुद को खोज सकूं...