बादल हंस रहे थे...

बारिश में भीगते हुए

एक जगह बैठ गया

एक पतली सी

धार बहा लायी थी कुछ रेट

मैंने चुपके से रेत पर

उनका नाम लिख दिया

और खुस हुआ कि कोई देख नहीं रहा है

और फिर क्या था बिजली चमकी

थोड़ी देर फिर बारिश हुयी

और पानी की वह पतली धार

आई और बहा ले गयी

उनका नाम…

मैंने ऊपर देखा तो बादल हंस रहे थे…

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