बेहोशी
जब हमारे शारीर की पहुच दिमाग तक थोड़ी देर तक नहीं रह जाती तो उसे बेहोशी कहते हैं . बेहोशी में दिमाग गहरी निद्रा में सो जाता है .शारीर की इस अवस्था में हम शारीर के साथ कुछ भी करें दर्द नहीं होता है .लेकिन जागने के बाद उसको यह पता होता है कि वह बेहोश था. और उसके साथ क्या हुआ .
एक बेहोशी और है जिसके आने पर हमारे पुरे शारीर का नियंत्रण समाप्त हो जाता है .उसपर दिमाग का भी नियंत्रण समाप्त हो जाता है . इसबात की संभवना भी समाप्त हो जाती है की वह जागने के बाद उसको पता चले कि उसके साथ क्या हुआ क्यूंकि वह पहले तो जगता ही नहीं अपवाद स्वरूप उस बेहोशी से कोई उठा हो .इस बेहोशी का नाम है धर्मान्धता.यह बेहोशी लोगों लोगों के सरे दुखों को समाप्त कर देती है .फिर उसको अपनी अवस्था का तनिक भी ज्ञान नहीं होता है वह और मरने के बाद उसे जिस स्वर्ग और लोक का ज्ञान कराया जाता है वह भी मिला की नहीं यह कोई नहीं जानता है .और खुद वह एक अनंत अनिश्चितता में विलीन हो जाता है जिसकी वापसी की कोई गुंजाईश नहीं होती है .
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