बसंत की अब बस याद आती है
सरसों के पीले खेत,
हरे रंग के कमीज और लाल दुपट्टे में लिपटी
उस गावं की लड़की की ...
बेरंग बत्तियों के शहर में
अब बस याद आती है
बसंत की अब बस याद आती है....
महुए की मदहोश महक
पलाश के फुल की रंगत
हवा में तैरते परागों की खुसबू
नाक पे इत्रों की चादर डाले
भ्रमर को अब बस याद आती है ...
बसंत की अब बस याद आती है
कोयलों का आम के डाल पे कुहक
गेहूं की बालियों नृत्य सूरज का उत्तरायन
चने की ठोठियों की पूर्वा से बलखाती लचक
गावं की टोलियों का वह फाग का गायन
सड़क के शोर से घायल
श्रवण में बस गुनगुनाती है
बसंत की अब बस याद आती है ...
हवा में मुट्ठियाँ लहराते ,दिल में आँधियां बांधे
कांध पे धपलियाँ टाँगे ,नारों की शमा बांधे
भगत के फांसी के फंदे की वह कसक
जुमलों के दिवास्वप्न में खोकर
जवानी की वह बसंती उमंग
अब बस याद आती है
बसंत की अब बस याद आती है ...
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sath hi yaad aata hai tumhara in yadon men mere sath hona bhi
जवाब देंहटाएंHan thik yad dilata
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