एक खबर

एक खबर
हमें जगा जाती है
हमारी नीद उसी ख़बर में
पंक्षियों की कलरव गीत खोज लेती है ...
खबरों का एक दौर चलता है दिन भर
उन्हीं खबरों से कोई अपना दुश्मन
तो कोई मन का मीत खोज  लेता है ...
मकानों के भीड़ में जो मीलों दूरियां है
खबरों की इसी  रुखी दुनियां में 
हमारी मुश्कान हंसी खोज लेती है
हर शाम दिन की सबसे बड़ी खबर है
इसी बड़ी खबर की तन्हा भीड़ से
 उदासी,आँखों की नमीं खोज लेती...
दिन भर की थकी रातें
हर जगह बस वही बातें
इन बातों में  कोई सुकून खोजता है
पर इन खबरों की अदला-बदली में
नीद अपने लिए लोरी खोज लेती है ....
फिर एक नई सुबह होती है
एक खबर से ....

 



 

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