कानून के उलझे हाथ

     कानून के हाथ लम्बे थे और देवी अंधी .कानून के हाथ लम्बे इसलिए भी थे की ज्यादा लोगों तक पहुच सके लेकिन भीड़ इतनी थी की छोटे हाथ सब तक पहुच ही न पाते इसलिए कानून अपने हाँथ लम्बे कर लिए.कानून के यही लम्बे हाथ समय के साथ और लम्बे होते गए कानून लोगों से दूर होता गया.कई लोगों ने कानून के लम्बे हाथों से इतना दूर है की आजतक कानून वहां तक पहुच ही नहीं पाया .कई लोगों ने कानून  के हाथ को अपने ताकत से इतना मोड़ा कि लम्बे हाथ आपस में ही उलझ  गए , कानून के हाथ खुद कानूनी सिकंजे में फंस गए. इन हाथों में हजारों जेबें हैं जो आज नोटों के वजन से दबी जा रहीं और वजन इतना हो गया कि कोई वजनदार इन हाथों से उठता ही नहीं .बस वही उठ पता है इन हाथों से जिसके जेब में नोटों की वजनदार गड्डी नहीं है . इन उलझे हाथों में कई गांठे बंध गयी.आज कानून     पहुचता तो हैं लोगों के पास लेकिन उलझे हुए हाथों से .कानून के उलझे हुए हाथ  अपने आपको सुलझाने में इतना वक्त लगा देते हैं की किसी का पूरा जीवन कानून तक पहुचने में ही लग जाता है .
      

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