उपलब्धि
साल का अंतिम दिन
जब हर कोई
गिन रहा था अपनी उपलब्धियों को
जब हर कोई गिन रहा था अपनी नाकामियों को
शहर में काम करके लौटा सोहन
अपने खेत की मेड पर बैठा
देख रहा था सूखे खेत ....
अतीत यादों का एक तालाब है,जिसमें हम कभी भी डुबकी लगा सकते हैं तैर सकते हैं गुजरे समय में यात्रा कर सकते हैं। इसी तरह साहित्य भी अतीत का सागर है जिसमें साहित्य शिल्पी कल्पनालोक में डूब कर उससे एकाकार हो जाते हैं।इसी महासागर की कुछ सीपियां हमारे हमारे वर्तमान को सुखद बना देती हैं, भविष्य को रोशन कर देती है... शेखर की डायरी के यह पन्ने अतीत के सागर की सिपियों से निकले कुछ मोती हैं,जिन्हें मैं इसलिए एक डोर में गूंथ रहा हूं ताकि आत्मवलोकन कर सकूं,खुद को खोज सकूं...
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