उपलब्धि

साल का अंतिम दिन 
जब हर कोई 
गिन रहा था अपनी उपलब्धियों को 
जब हर कोई गिन रहा था अपनी नाकामियों को 
शहर में काम करके लौटा सोहन 
अपने खेत की मेड पर बैठा 
देख रहा था सूखे खेत ....

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