रावण एक सनातन विलन

      हर एक समाज को एक हीरो के साथ एक  विलेन चाहिए होता है.जिस पर वे सारी बुराइयों को आरोपित कर सकें .विश्व के सारे धर्मों में कोई न कोई विलन जरुर होता है .हीरो की महानता इस बात से भी तय होती है कि विलन कितना ताकतवर था .या फिर हीरो की महानता को बढ़ाने के लिए विलन में सारे गुणों को आरोपित कर दिया जाता है .भारत एक धर्मप्रधान देश है .भारत में अनेक प्रकार के किस्से और कहानियां प्रचलित हैं सब में कोई न कोई विलन जरुर होता है .बच्चो की कहानियों में भी एक ऐसा किरदार जरुर होता है जो विलन जैसा होता है .दिन भर चलने वाले टी वी सीरियल में कभी सास को विलन के रूप में दिखया जाता है कभी बहू को तो कभी ननद को .फिल्म में तो बहुत समय तक यही होता रहा बिना विलन की फ़िल्में की कोई कल्पना तक नहीं कर सकता था .क्योंकि फिल्मों में विलन के अत्याचार से हीरो के प्रति सहानुभूति स्वाभाविक रूप से पैदा हो जाती थी .विलेन के होने से कहानी बड़ी आसन हो जाती है .विलन जितना स्पष्ट होता कहानी उतनी ही आसान .विलेन के होने से सबसे बड़ी आसानी किसी घटना के व्याख्या करने में होती है जैसे-गेंहूँ के खेत को  कोई जला दे और यदि उस गावं में कोई पहले से स्थापित विलन है तो बड़ी आसानी से उसपर आरोप लगा के शांत होया जा सकता है .यदि गाँव में कोई विलन की छवि नहीं है तो भूत एक प्रकार का विलन होता है जो गेहूं  के खेत जलने की व्याख्या में मदत करता है , क्योंकि भगवान  हमेश सही काम करतें हैं यह माना जाता है .
     भारत में एक स्थापित विलन है रावण .जिसमें सारे के सारे अवगुण आरोपित किए जा सकते है .विजय दशमी के अवसर पर सारे लोग मिलकर रावन के पुतले को जला डालते हैं और घोषणा होती है बुराई पर अच्छाई की      विजय की .जीतनी बुराइयाँ समाज में हैं उसका प्रतिक रावण है उसको जलाने के बाद समाज की सारी बुराइयाँ समाप्त हो जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं .हर साल रावण के पुतले को जलाया जाता है .इस चक्कर में हम असली समस्या का समाधान नहीं कर पाते हैं .क्योंकि हमें यह आभाष ही नहीं हो पाता की बुराई हम में है .हम रोगों का कारण यदि भूत पर दल दें तो रोगों के इलाज से वंचित रह जायेगें .खेत का गेंहूँ जल रहा है तो कोई जलाने वाला होगा .उसका पता लगाने की जगह हम सीधे किसी विलन पर आरोप लगा देने से समस्या वैसी ही बनी राहत है जैसे वह पह्के थी .
     बुराई और अच्छाई दोनों सापेक्षिक सत्य होते हैं .जो आपको बुरा लगे हो सकता है किसी की वह अच्छाई हो सकती है .आप के देश में कुछ प्रचलित मान्यताएं सही हो सकती हैं लेकिन किसी और देश में वह मान्यता गलत मानी जा सकती है .इसलिए यदि विलन होने का आधार यदि बुराई है तो असल में कोई विलन नहीं हो सकता है .
रावण भारत में किसी वर्ग के लिए विलन हो सकता है लेकिन कुछ समुदाय के लिए नहीं .क्योंकि अच्छाई और बुराई देश और काल के अनुसार बदलते रहते हैं .
     
   
     
       

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