जब तुम बिछुड़ना तो....




जब तुम बिछुड़ना तो ...
कह देना कोई बात झूठी  ही सही
जो समय के जख्मों पे मरहम लगा दे …
जो तेज होती सांसों को
थमा दे
जो लोरी बन के मुझे सुला दे …
बोल जाना कोई सब्द झूठा ही सही ….
जो चिपक जाये मेरे दिल की दीवारों पर
लिख देना कोई कविता झूठी ही सही
जिसकी व्याख्या में गुजर जाये ये जीवन  
बहा देना कुछ आंसू झूठा ही सही
जिससे मुरझाये हुए हुयी दिल की बगिया
हरी हो जाय सदा के लिए
जब बिछुड़ना तो
जाते जाते रुक जाना और पीछे मुड़ क़र
देख जाना झूठा ही सही ….
जो राह के धूप को,
छाव कर दे...

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