लघु कथा

            सब ठीक है...

     हर शाम की तरह आज भी मनोज ने शिखा को फोन किया और मुस्कराते हुए पूछा
कैसी हो शिखा ?शिखा ने उत्तर दिया ठीक हूँ .आप कैसे हैं ?मनोज ने कहा मैं भी ठीक हूँ .
फिर उसने पूछा .तुमने खाना खाया ?शिखा ने उत्तर दिया हाँ खा लिया .और आप ने खाया
मनोज ने कहा हाँ खा लिया हूँ .कुछ देर लगभग ३० सेकेण्ड तक दोनों चुप रहे फिर मनोज ने एक लाइन का कोई गीत गुनगुनाया .चुप होते ही बोला
 ठीक है फिर गुड नाईट .
शिखा ने भी कहा गुड नाईट .
मनोज ने फोन को जेब में रखते हुए जो लाइन गुनगुना रहा था वह स्पष्ट रूप से गाने लगा
जिन्दगी प्यार की दो चार घडी होती है ......
जितनी भी हो ये उम्र ....,

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