लिखना मौन की व्याख्या है
हम लिखते वक्त मौन रहते है .या जब भी लिखते हैं मौन में जो संवेगिक उफान आता है उसके कारण लिखते है .लिखना भी कई प्रकार का होता है लिखने के लिए जब लिखा जाता है तो उसमें वह बात नहीं होती जो मौन में उफान के कारण होती है .लिखते वक्त हम कुछ नहीं बोलते है हमारी जितनी भी उर्जा होती है वह दिमाग खर्च कर रहा होता है कल्पना के घोड़े को दौड़ाने में भावनावों को शब्द रूप देने में .हम कोई थीसिस लिखते है तो एकांत में जा कर लिखतें है तो ज्यादा अच्छा लिख पातें है .हमारे सारे महाकाव्य जंगल के घोर सन्नाटे में लिखे गये ,उसमें जो काल्पन और भावनावों की उडान है वह डूब जाने लायक है .जब लेखन में गहराई होती है तभी तो पाठक उसमें डूब पाता है .इसलिए जो भी लिख रहें है उनका यह दायित्व हो जाता है कि पाठक के डूबने लायक गहराई दें अपने लेखन में .एक बात यह भी है की आज का ज्यादातर पाठक डूबना नहीं चाहता है लेकिन फिर भी लेखक का दायित्वा है की वह अपनी रचना में व्यापक गहराई दे .और एक बात यह भी है की यह कोई तालाब तो है नहीं की फावड़ा लिया और गहरा कर दिया .यह तो मौन और भावनावों को बहुत दिनों तक संभाल कर रखने और अनुभवों में जीने से आती है . मौन कोशिस करके नहीं आता है यह तो हमारी गहराई के अनुसार बढता जाता है .प्रशांत महासागर इतना शांत क्यों है क्योंकि उसकी गहराई बहुत ज्यादा है .
हम धर्मवीर भारती ,प्रसाद ,निराला ,सुमित्रानंदन ,मसदेवी ,मन्नूभंडारी इनसब को पढतें हैं तो लगता है कि जैसे ये लोग मेरियाना गर्त में डूबे हुए थे वही से जब उनके पास ज्यादा रत्न हो गये तो उन्होंने सोचा थोडा ऊपर दे आते हैं .इन्होने साहित्य को इतनी गहराई दी की आज भी हम डूब जातें हैं .मृत सागर में कोई नहीं डूबता क्योकि उसके पानी में नमक की मात्र बहुत ज्यादा है .लेकिन जहाँ नमक की मात्र कम होती है ,खारापन कम होता है वहां डूबने के लिय यत्न नहीं करना पड़ता है .यही बात साहित्य पर भी लागू होती है .
हम धर्मवीर भारती ,प्रसाद ,निराला ,सुमित्रानंदन ,मसदेवी ,मन्नूभंडारी इनसब को पढतें हैं तो लगता है कि जैसे ये लोग मेरियाना गर्त में डूबे हुए थे वही से जब उनके पास ज्यादा रत्न हो गये तो उन्होंने सोचा थोडा ऊपर दे आते हैं .इन्होने साहित्य को इतनी गहराई दी की आज भी हम डूब जातें हैं .मृत सागर में कोई नहीं डूबता क्योकि उसके पानी में नमक की मात्र बहुत ज्यादा है .लेकिन जहाँ नमक की मात्र कम होती है ,खारापन कम होता है वहां डूबने के लिय यत्न नहीं करना पड़ता है .यही बात साहित्य पर भी लागू होती है .
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