अस्तित्व का संकट
हम क्यों जी रहे हैं ?हम जन्मे क्यों है ?जन्म लेने के पीछे उद्देश्य क्या है ?सकल जीव जगत क्यों जी रहा है ?क्या हमें किसी ने भेजा है .या फिर हम मात्र एक संयोग हैं .यदि किसी सत्ता ने हमें यहाँ भेजा है तो हमारा कुछ मकसद होगा ?यदि हमारा कोई मकसद नहीं तो तो फिर हम क्या कर रहे हैं ?ये सारे प्रश्न हमें बेचैन कर देते हैं .ये प्रश्न अस्तित्व के संकट के प्रश्न हैं .जिनसे गुजरने के बाद ही हम सही रूप में अपने आप को समझ पाते हैं .यह भी मन में आता है कि समझ के ही क्या कर लेगें .क्यों की कुछ करना और कुछा न करना सब बराबर है .कुछ पा कर भी कुछ नहीं मिल सकता है .यह सब भी इसी संकट का ही एक रूप है .अब यहाँ पर या तो हम अपने जीवन को ख़तम कर सकते हैं या जीवन को किसी एसे उद्देश्य को पाने में लगा दें जिससे हमें यह पता चल जाए की हम जन्में क्यों हैं .यहाँ पर मोटिवेशन कुछ जानना है .यहाँ पर सृजन की भावना काम करती है .यह सृजन कुछ पाने की चाह नहीं रखती .यहाँ सृजन का मतलब परमानन्द से है .
हमारा अस्तित्व क्या है ?इसी राह पर चल कर दर्शन और विज्ञान आगे बढ़ रहा है .इन प्रश्नों से दो चार होने के बाद ही विश्व में जितने भी विषयों का अध्ययन हम कर रहें है सब सामान लगने लगता है,चाहे वह इतिहास हो चाहे विज्ञान और भूगोल ,चाहे वह दर्शन हो चाहे साहित्य सब बराबर हो जातें हैं .क्योंकि सब में वही तड़प दिखाई देती है अपने आप को पाने की .यह जान लेने की कि इस जगत का उद्देश्य क्या है . यह जानने के लिए जब विज्ञान आगे बढ़ता है तो विज्ञान अभिशाप नहीं नहीं बनता .हमने देखा धरती के अन्दर एक महा प्रयोग हुआ .जिससे बिग-बैंग सिद्धांत को समझने की कोसिस की गयी .यह अपने आप को समझने का ही हिस्सा है .अब क्वांटम फिजिक्स की बात की जाय तो वह तत्वों को समझने में लगा है .एसे ही जीव वैज्ञानिक हैं जो कोशिका के अन्दर अपने अस्तित्वा को खोज रहें हैं .इतिहासकार ,साहित्यकार ,दार्शनिक सब अपने आप को खोजने में लगे हुए हैं .और यह तड़फ उनके अन्दर अस्तित्व के संकट का सामना करके ही आयी है .जो इस अनुभव से हो कर गुजर जातें हैं वही यह सब बखूबी कर पातें हैं .यह संकट हमें कुछ करने के लिए प्रेरित करती है .इसलिए अस्तित्व का संकट बुरा नहीं है .यह आना ही चाहिए .यह आता है तभी निष्कामता आती है जो कला को निष्पक्ष बनती है .
अब हम आतें हैं दूसरी तरफ जहाँ हमारे पास बने बनाये उद्देश्य होते हैं .हमें ये करना है हमें वह करना है .किसी को सुख पूर्वक जीवन जीना है तो किसी को खूब सारा धन कमाना है .यह कभी नहीं सोच पाते की यह क्यों कर रहे है बस करना है तो करना है .इसलिए भौतिक उपलब्धियों में उन लोगों से बहुत आगे दिखाई देते है जो अस्तित्व के संकट से गुजर रहें हैं .यह सब होता क्यों है क्योंकि हमारे मन में एक निश्चितता बनी रहती है कि यह पाने पर वह मिलजायेगा .या वह मिलने पर अमुख चीज मिल जाएगी .इसी खोने पाने में सारा जीवन ख़तम हो जाता है .यहाँ पर मोटिवेशन के लिए सुख है .यहाँ पर सृजन नही है .यहाँ सृजन का अलग स्वरुप है .यहाँ सृजन मनोरंजन है .
हमारा अस्तित्व क्या है ?इसी राह पर चल कर दर्शन और विज्ञान आगे बढ़ रहा है .इन प्रश्नों से दो चार होने के बाद ही विश्व में जितने भी विषयों का अध्ययन हम कर रहें है सब सामान लगने लगता है,चाहे वह इतिहास हो चाहे विज्ञान और भूगोल ,चाहे वह दर्शन हो चाहे साहित्य सब बराबर हो जातें हैं .क्योंकि सब में वही तड़प दिखाई देती है अपने आप को पाने की .यह जान लेने की कि इस जगत का उद्देश्य क्या है . यह जानने के लिए जब विज्ञान आगे बढ़ता है तो विज्ञान अभिशाप नहीं नहीं बनता .हमने देखा धरती के अन्दर एक महा प्रयोग हुआ .जिससे बिग-बैंग सिद्धांत को समझने की कोसिस की गयी .यह अपने आप को समझने का ही हिस्सा है .अब क्वांटम फिजिक्स की बात की जाय तो वह तत्वों को समझने में लगा है .एसे ही जीव वैज्ञानिक हैं जो कोशिका के अन्दर अपने अस्तित्वा को खोज रहें हैं .इतिहासकार ,साहित्यकार ,दार्शनिक सब अपने आप को खोजने में लगे हुए हैं .और यह तड़फ उनके अन्दर अस्तित्व के संकट का सामना करके ही आयी है .जो इस अनुभव से हो कर गुजर जातें हैं वही यह सब बखूबी कर पातें हैं .यह संकट हमें कुछ करने के लिए प्रेरित करती है .इसलिए अस्तित्व का संकट बुरा नहीं है .यह आना ही चाहिए .यह आता है तभी निष्कामता आती है जो कला को निष्पक्ष बनती है .
अब हम आतें हैं दूसरी तरफ जहाँ हमारे पास बने बनाये उद्देश्य होते हैं .हमें ये करना है हमें वह करना है .किसी को सुख पूर्वक जीवन जीना है तो किसी को खूब सारा धन कमाना है .यह कभी नहीं सोच पाते की यह क्यों कर रहे है बस करना है तो करना है .इसलिए भौतिक उपलब्धियों में उन लोगों से बहुत आगे दिखाई देते है जो अस्तित्व के संकट से गुजर रहें हैं .यह सब होता क्यों है क्योंकि हमारे मन में एक निश्चितता बनी रहती है कि यह पाने पर वह मिलजायेगा .या वह मिलने पर अमुख चीज मिल जाएगी .इसी खोने पाने में सारा जीवन ख़तम हो जाता है .यहाँ पर मोटिवेशन के लिए सुख है .यहाँ पर सृजन नही है .यहाँ सृजन का अलग स्वरुप है .यहाँ सृजन मनोरंजन है .
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें